नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से । वीडियो से छेड़छाड़ कर प्रसारित करने के मामले में इंडिया न्यूज के पूर्व रिपोर्टर ललित बड़गुर्जर को भेजा गया जेल!
नाबालिग बच्ची और उसके परिवार से जुड़े एक निजी वीडियो को तोड़-मरोड़कर अश्लील रूप में प्रस्तुत करने के मामले में गत 1 मार्च 2025 को गुरुग्राम की पोक्सो अदालत ने इंडिया न्यूज के तत्कालीन जोधपुर रिपोर्टर ललित बड़गुर्जर को जेल भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। यह मामला वर्ष 2013 का है, जिसमें कुल आठ पत्रकारों पर पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और आईपीसी की कई धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मामले में पैरवी करने वाली संस्था जन जागरण मंच से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला 2013 का है, जब कुछ पत्रकारों ने कथित रूप से एक नाबालिग बच्ची और उसके परिवार से जुड़े निजी वीडियो को तोड़-मरोड़कर प्रसारित किया था। एफआईआर के मुताबिक, यह वीडियो बापू आसाराम जी के एक भक्त का था, बापू आशाराम जी वर्ष 2013 में अपने भक्त के घर पैगफेरे के लिए गए थे। और बच्ची को आशीर्वाद दिए थे। जिसे आरोपियों ने गलत तरीके से पेश कर न केवल बच्ची और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई, बल्कि आसाराम बापू की छवि को भी खराब करने का प्रयास किया गया।
पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर इन पत्रकारों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट 13(C) 23, आईटी एक्ट 67(B), और आईपीसी की धारा 120-B, 471, 469 के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले में कोर्ट ने 25 अगस्त 2023 को सभी पत्रकारों पर आरोप तय उपरोक्त धाराओं में आरोप किए और वर्तमान में ट्रायल प्रक्रिया जारी है।
8 पत्रकारों पर लगे हैं आरोप
पीड़िता के वकील धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के जानकारी के अनुसार इस मामले में 8 पत्रकार आरोपी हैं, जिनमें
दीपक चौरसिया,चित्रा त्रिपाठी,अजीत अंजुम,सैयद सोहेल,राशिद हाशमी,अभिनव राज,ललित बड़गुर्जर
अन्य पत्रकार शामिल है। कोर्ट ने ट्रायल प्रक्रिया के दौरान सभी आरोपियों को हर सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया था।
कोर्ट में पेश न होने पर ललित बड़गुर्जर को भेजा गया जेल
हाल ही में,बीते 11 फरवरी 2025 को ललित बड़गुर्जर की अदालत में अनुपस्थिति के चलते उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। इसके बाद 1 मार्च 2025 को हुई सुनवाई में उन्होंने अपनी गैरहाजिरी का कारण बताया, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया और सीधे जेल भेजने का आदेश दे दिया।
इस केस में पहले भी कई पत्रकारों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी हो चुके हैं। बीते कुछ महीने पहले चित्रा त्रिपाठी और सैयद सोहेल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था, लेकिन उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। दीपक चौरसिया पर भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें 2 लाख रुपये के जुर्माने के साथ जमानत दी।
कोर्ट की सख्ती जारी, ट्रायल प्रक्रिया में कोई राहत नहीं
कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सभी आरोपियों को हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहना अनिवार्य है। कोई भी लापरवाही ट्रायल में देरी का कारण नहीं बन सकती। ललित बड़गुर्जर की गैरहाजिरी को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें जेल भेज दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई जल्द होने वाली है, जिसमें अन्य पत्रकारों को भी अदालत में उपस्थित रहना होगा। कोर्ट की सख्ती को देखते हुए संभावना है कि यदि कोई और आरोपी सुनवाई में उपस्थित नहीं होता, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
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